सोमवार, 16 जुलाई 2018

जीवन में प्रगति करने का सर्वोत्तम मूल

     जीवन में प्रगति करने का सर्वोत्तम मूल


एक सिद्धांत  "बहरे बनो" 

              मेढ़क की कहानी
एक छोटे से गढढ़े में चार मेंढक गिर गएसारे मेंढक उस गढढ़े के आसपास आ गए और गिरे हुए साथियों का हौसला बढ़ाने लगेहर तरफ से आवाज आ रही थीएक बार पूरी ताकत लगाकर बाहर हो जाओ,हिम्मत मत हारोडटे रहोकुछ देर तक कोशिश करते रहे थोड़ी देर बाद ही बुरी तरह थक चुके थे
कुछ देर बाद ऊपर से कुछ नकारात्मक मेंढक आए और गड्ढे में गिरे मेंढको को समझाया कि अब तुम प्रयास करना छोड़ दोअब तुम नहीं बच सकते अब आखिरी समय में क्यों शरीर को कष्ट दे रहे हो ऐसा करो भगवान का नाम लो और मृत्यु को भगवान की मर्जी मानकर स्वीकार कर लो सभी मेंढक जोरजोर से भगवान से प्रार्थना करने लगे
हिम्मत हार कर कुछ ही देर में तीनों मेंढको की मौत हो गई लेकिन चौथे ने अचानक पूरी ताकत से ऊपर की ओर छलांग लगाई। और वह बच गयाउसने बाहर आकर सबको हिम्मत बढ़ाने के लिए धन्यवाद दिया दूसरे मेंढक को समझ नहीं आ रहा थाकि आखिर यह धन्यवाद क्यों कह रहा है क्योंकि हम सब तो भगवान से यह प्रार्थना कर रहे थे कि इनकीआत्मा को शांति मिले बाद में पता चला कि वह चौथा मेंढकबहरा था और जोरजोर से प्रार्थना कर रहे दूसरे मेंढक को देखकर उसे ऐसे लगा मानो सब उसकी हिम्मत बढ़ा रहे थे।

कहानी का आशय– जब भी कोई आपके सामने नकारात्मक बात करें आपकी क्षमताओं पर उंगली उठाएआपका समय व्यर्थ करें तो "बहरे हो जाओ"

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      धन्यवाद जय भारत 
  जय सत्य सनातन वैदिक धर्म 

अब आज का प्रश्न- जो मेढ़क बाहर आ गया, उस मेढ़क की  बाहर निकलने के बाद क्या प्रतिक्रिया थी|
     आप हमें अपना उत्तर कमेन्ट बॉक्स में दे सकते हैं|
        

1 टिप्पणी:

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