जीवन में प्रगति करने का सर्वोत्तम मूल
एक सिद्धांत "बहरे बनो"
मेढ़क की कहानी
एक छोटे से गढढ़े में चार मेंढक गिर गए।सारे मेंढक उस गढढ़े के आसपास आ गए और गिरे हुए साथियों का हौसला बढ़ाने लगे।हर तरफ से आवाज आ रही थी, एक बार पूरी ताकत लगाकर बाहर हो जाओ,हिम्मत मत हारो, डटे रहो, कुछ देर तक कोशिश करते रहे थोड़ी देर बाद ही बुरी तरह थक चुके थे।
कुछ देर बाद ऊपर से कुछ नकारात्मक मेंढक आए और गड्ढे में गिरे मेंढको को समझाया कि अब तुम प्रयास करना छोड़ दो, अब तुम नहीं बच सकते। अब आखिरी समय में क्यों शरीर को कष्ट दे रहे हो ऐसा करो भगवान का नाम लो और मृत्यु को भगवान की मर्जी मानकर स्वीकार कर लो। सभी मेंढक जोर–जोर से भगवान से प्रार्थना करने लगे।
हिम्मत हार कर कुछ ही देर में तीनों मेंढको की मौत हो गई लेकिन चौथे ने अचानक पूरी ताकत से ऊपर की ओर छलांग लगाई। और वह बच गया, उसने बाहर आकर सबको हिम्मत बढ़ाने के लिए धन्यवाद दिया दूसरे मेंढक को समझ नहीं आ रहा था, कि आखिर यह धन्यवाद क्यों कह रहा है क्योंकि हम सब तो भगवान से यह प्रार्थना कर रहे थे कि इनकीआत्मा को शांति मिले बाद में पता चला कि वह चौथा मेंढकबहरा था और जोर–जोर से प्रार्थना कर रहे दूसरे मेंढक को देखकर उसे ऐसे लगा मानो सब उसकी हिम्मत बढ़ा रहे थे।
कहानी का आशय– जब भी कोई आपके सामने नकारात्मक बात करें आपकी क्षमताओं पर उंगली उठाए, आपका समय व्यर्थ करें तो "बहरे हो जाओ"
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धन्यवाद जय भारत
जय सत्य सनातन वैदिक धर्म
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Bahut khoob
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